उत्तरांचल राज्य के सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली 2002 | Sthayikaran Niyamawali 2002

उत्तरांचल राज्य के सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली 2002 | Sthayikaran Niyamawali 2002

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उत्तरांचल राज्य के सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली, 2002 की मुख्य बातें

उत्तराखंड शासन द्वारा जारी स्थायीकरण नियमावली 2002 में संविदा/अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण (स्थायीकरण) को लेकर विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। यह नियमावली उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से विभागों में कार्यरत हैं और सेवा की स्थिरता की अपेक्षा रखते हैं।

नीचे दिए गए डाउनलोड बटन से आप नियमावली को पीडीऍफ़ में डाउनलोड कर सकते है.


स्थायीकरण का उद्देश्य

स्थायीकरण नियमावली का मुख्य उद्देश्य है:

  • लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्रदान करना
  • विभागीय कार्यकुशलता बनाए रखना
  • न्यायसंगत और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नियमित नियुक्ति सुनिश्चित करना
  • न्यायालयों के निर्देशों एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं का पालन करना

प्रमुख प्रावधान

1. पात्रता शर्तें

नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि स्थायीकरण के लिए कर्मचारी को:

  • निर्धारित तिथि तक न्यूनतम सेवा अवधि पूर्ण करनी होगी
  • संबंधित पद पर विधिवत नियुक्ति/चयन प्रक्रिया से जुड़ा होना चाहिए
  • आवश्यक शैक्षिक योग्यता एवं सेवा शर्तें पूरी करनी होंगी

यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि केवल पात्र और योग्य कर्मचारी ही नियमित किए जाएं।


2. सेवा अवधि का निर्धारण

पीडीएफ में सेवा अवधि की गणना संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। निरंतर सेवा, कार्य दिवसों की गणना, तथा अनुमन्य अवकाश अवधि को लेकर नियम निर्धारित किए गए हैं।


उत्तरांचल राज्य के सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली, 2002 | Sthayikaran Niyamawali 2002 Download

3. चयन एवं परीक्षण प्रक्रिया

स्थायीकरण के लिए:

  • विभागीय स्तर पर पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार की जाएगी
  • आवश्यकता पड़ने पर स्क्रीनिंग/परीक्षण/मूल्यांकन किया जा सकता है
  • अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा

यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु निर्धारित की गई है।


4. पद उपलब्धता का प्रावधान

स्थायीकरण उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष किया जाएगा। यदि रिक्त पद सीमित हों, तो वरीयता निर्धारण के आधार पर चयन किया जाएगा।


5. सेवा शर्तें

स्थायीकरण के पश्चात:

  • कर्मचारी नियमित वेतनमान के पात्र होंगे
  • सेवा नियम, आचरण नियम और अन्य सरकारी प्रावधान लागू होंगे
  • वरिष्ठता निर्धारण संबंधित नियमों के अनुसार किया जाएगा

नियमावली का महत्व

यह नियमावली उन कर्मचारियों के लिए राहतकारी है जो लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था में कार्य कर रहे हैं। इससे:

  • नौकरी की अस्थिरता कम होगी
  • प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायित्व आएगा
  • कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा

किन्हें विशेष ध्यान देना चाहिए?

  • संविदा/दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी
  • विभागाध्यक्ष एवं नियुक्ति प्राधिकारी
  • कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि

निष्कर्ष

उत्तराखंड शासन द्वारा लागू की गई स्थायीकरण नियमावली प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली को भी अधिक सुव्यवस्थित बनाती है।

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