शासनादेश संख्या 21 दिनांक 25 अक्टूबर, 2005 | Uttarakhand NPS GO no. 21 25.10.2005 | उत्तरांचल शासन वित्त (सामान्य नियम वेतन आयोग) अनुभाग-7 संख्या – 21 /XXVII(7) अं0 पे०यो०/2005 देहरादून : दिनांक 25 अक्टूबर, 2005 के द्वारा उत्तराखंड राज्य सरकार ने, अपने दीर्घकालीन राजकोषीय हितों और केन्द्र सरकार द्वारा अपनाई गई रीति के विस्तृत अनुसरण को दृष्टिगत रखते हुए,राज्य सरकार की सेवा में और ऐसे समस्त शासन के नियंत्रणाधीन स्वायत्तशासी संस्थाओं और शासन से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में, जिनमें राज्य कर्मचारियों की वर्तमान पेंशन योजना की भाँति पेंशन योजना लागू है और उनका वित्त पोषण राज्य सरकार की समेकित निधि से किया जाता है, नये प्रवेशकों पर वर्तमान में परिभाषित “लाभ पेंशन योजना” के स्थान पर नवपरिभाषित “अंशदान पेंशन योजना” लागू करने के नियम दिए गए हैं.

उत्तराखंड: नई अंशदायी पेंशन योजना (NPS) – क्या है सरकारी आदेश और इसके मुख्य नियम?
उत्तराखंड सरकार (तत्कालीन उत्तरांचल) ने 2005 में राज्य के वित्तीय हितों और केंद्र सरकार की नीति का अनुसरण करते हुए एक बड़ा बदलाव किया था। 25 अक्टूबर 2005 को जारी अधिसूचना के माध्यम से राज्य में पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर “नई अंशदायी पेंशन योजना” लागू की गई थी ।
यदि आप सरकारी सेवा में हैं या इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव को समझना चाहते हैं, तो यहाँ इस शासनादेश की मुख्य बातें दी गई हैं:
1. योजना कब से और किन पर लागू हुई?
- प्रभावी तिथि: यह योजना 01 अक्टूबर 2005 से अनिवार्य रूप से लागू की गई ।
- पात्रता: यह नई भर्तियों के साथ-साथ राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन स्वायत्तशासी संस्थाओं और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के नए प्रवेशकों पर लागू है ।
- विकल्प: वे कर्मचारी जिनकी सेवा 01 अक्टूबर 2005 को 10 वर्ष से कम थी, उन्हें भी इस नई योजना को चुनने का विकल्प दिया गया था
शासनादेश संख्या 21 दिनांक 25 अक्टूबर, 2005 | Uttarakhand NPS GO no. 21 25.10.2005
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2. अंशदान का गणित (Tier-1 और Tier-2)
योजना को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
- टियर-1 (अनिवार्य): कर्मचारी के वेतन, महंगाई वेतन और महंगाई भत्ते का 10% मासिक अंशदान काटा जाता है । इतनी ही धनराशि (10%) का योगदान राज्य सरकार या नियोक्ता द्वारा किया जाता है ।
- टियर-2 (स्वैच्छिक): कर्मचारी अपनी इच्छा से एक अलग खाता रख सकते हैं, लेकिन इसमें सरकार कोई अंशदान नहीं करेगी । इस खाते से कर्मचारी कभी भी पैसा निकालने के लिए स्वतंत्र है ।
3. निकासी और सेवानिवृत्ति के नियम
- आहरण पर रोक: सेवा अवधि के दौरान टियर-1 खाते से किसी भी प्रकार की निकासी (withdrawal) की अनुमति नहीं है ।
- सेवानिवृत्ति पर: रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को अपनी कुल पेंशन संपत्ति का 40% हिस्सा किसी मान्यता प्राप्त बीमा कंपनी से वार्षिकी (annuity) खरीदने में निवेश करना अनिवार्य है । शेष 60% राशि एकमुश्त प्राप्त की जा सकती है ।
- समय से पूर्व सेवा छोड़ने पर: यदि कोई कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले ही योजना छोड़ता है, तो उसे अपनी पेंशन संपत्ति का 80% निवेश वार्षिकी में करना होगा ।
4. निवेश और प्रबंधन
- शुरुआत में, जब तक पेंशन निधि प्रबंधक (PFM) की नियुक्ति नहीं हुई, तब तक इन खातों का रखरखाव ‘निदेशक, लेखा एवं हकदारी, उत्तरांचल’ द्वारा किया गया
- इस निधि पर शुरुआती दौर में सामान्य भविष्य निधि (GPF) के समान ब्याज दर देने का प्रावधान किया गया था ।
- निवेश के लिए विभिन्न फंड मैनेजरों के विकल्प दिए गए हैं, ताकि कर्मचारी अपनी पसंद के अनुसार निवेश चुन सकें ।
5. आवश्यक प्रपत्र (Forms)
इस प्रक्रिया के लिए तीन मुख्य फॉर्म निर्धारित किए गए थे:
- प्रपत्र-1: सरकारी सेवक द्वारा व्यक्तिगत विवरण और नामांकन (Nomination) के लिए ।
- प्रपत्र-2: कार्यालयाध्यक्ष द्वारा डेटाबेस तैयार करने हेतु निदेशक को भेजने के लिए
- प्रपत्र-3: मासिक वेतन बिल के साथ अंशदान का विवरण देने के लिए ।
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